हिंदी के श्रेष्ठ निबंधकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन 1960 ईस्वी में बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था इनके पिता श्री अनमोल द्विवेदी ज्योतिषी और संस्कृत के प्रकांड पंडित थे इनकी माता का नाम ज्योतिषमति था काशी जाकर इन्होंने संस्कृत साहित्य और ज्योतिषी का उच्च स्तरीय ज्ञान प्राप्त किया उनकी प्रतिभा का विशेष विकास विश्वविख्यात संस्थान शांतिनिकेतन में हुआ वहां एक 11 वर्षों तक हिंदी भवन के निदेशक के रूप में कार्य करते रहे 1949 में लखनऊ विश्वविद्यालय ने इन्हें डिलीट के बाद से 1957 में भारत सरकार ने पद्म भूषण की उपाधि से विभूषित किया 19 मई 1979 ईस्वी को उनका स्वर्गवास हो गया
साहित्यिक योगदान-हजारी प्रसाद द्विवेदी साहित्य के प्रख्यात निबंधकार इतिहास लेखक अन्वेषक आलोचक संपादक तथा उपन्यासकार के अतिरिक्त कुशल वक्ता और सफल अध्यापक भी थे वे मौलिक चिंतक भारतीय संस्कृति और इतिहास के मर्मज्ञ बंगला तथा संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे इनकी रचनाओं में नवीनता और प्राचीनता का अपूर्व समन्वय था इन्होंने विश्वभारती और अभिनव भारती ग्रंथ माला का संपादन किया यह ललित निबंध लेखकों में अग्रणी है
भाषा शैली-आचार्य द्विवेदी की भाषा शुद्ध परिमार्जित पुराण और सरस खड़ी बोली है इनकी भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ उर्दू फारसी एवं अंग्रेजी के प्रचलित शब्दों का प्रयोग हुआ है इनकी शैली विचारात्मक भावात्मक व्यंगात्मक वर्णनात्मक आदि के रूप में दिखाई देती है
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