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जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय

 प्रसाद जी का जन्म 30 जनवरी 1889  ईस्वी में काशी के सुगनी साहू नामक प्रसिद्ध वैसे परिवार में हुआ था छोटी अवस्था में ही पिता तथा बड़े भाई के देहांत हो जाने के कारण इनका शिक्षा क्रम शीघ्र टूट गया घर का भार वहनहन करते हुए भी इन्होंने स्वाध्याय से हिंदी अंग्रेजी संस्कृत उर्दू फारसी का गहन अध्ययन किया परिवार जनों की मृत्यु अर्थंसंकट पत्नी वियोग आदि संघर्षों को झेलते हुए 14 जनवरी 1937 ईस्वी में स्वर्ग को सीधा रखें -साहित्यिक परिचय-जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रवर्तक उन्नायक तथा प्रतिनिधि कवि के होने के साथ-साथ युग प्रवर्तक नाटककार कथाकार तथा उपन्यासकार बीसीए विशुद्ध मानवतावादी दृष्टिकोण वाले प्रसाद जी ने अपने काव्य में आध्यात्मिक आनंद बाद की प्रतिष्ठा की है प्रेम और सौंदर्य इनके काव्य के प्रमुख विषय रहे हैं किंतु मानवीय संवेदना उनकी कविता का प्राण है

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जीवन परिचय

 अयोध्या सिंह उपाध्याय का जन्म 15 अप्रैल सन 18 सो 65 ईस्वी में निजामाबाद जिला आजमगढ़ उत्तर प्रदेश में हुआ था इनके पिता का नाम पंडित भोला सिंह उपाध्याय था 5 वर्ष की अवस्था में फंसी के माध्यम से इनकी शिक्षा प्रारंभ हुई इन्होंने अंग्रेजी पढ़ने के लिए प्रिंस कॉलेज में दाखिला लिया परंतु किसी कारणवश इन्हें कॉलेज छोड़ना पड़ा था इन्होंने स्वाध्याय हिंदी संस्कृत फारसी और अंग्रेजी से अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया निजामाबाद में मिडिल स्कूल के अध्यापक कानून को और काशी विश्वविद्यालय में अवैतनिक शिक्षक के रूप में कार्य किया 6 मार्च सन 1947 में उनका देहावसान हो गया साहित्यिक सेवाएं-हरि ओम जी दिवेदी युग के प्रतिनिधि कवि थे इन्होंने खड़ी बोली को नया रूप प्रदान किया तथा प्राचीन कथा नको में नवीन उद भावनाओं को समाहित किया भाषा की विविधता के साथ-साथ इन्होंने हिंदी छंदों में भी नवीन चंद की पद्धति की उधवा ना कि इन के काव्य में वात्सल्य रस एवं विप्रो लंबा श्रृंगार का जगमगाता हुआ रुक झलकता है भाषा शैली-भाषा की जैसी विविधता हरिऔध जी के काव्य में है वैसी विविधता महाकवि निराला के अतिरिक्त अन्य किसी के काव्य में...

प्रोफेसर जी सुंदर रेड्डी जीवन परिचय

 प्रोफेसर सुंदर रेड्डी का जन्म सन 1919 ईस्वी में आंध्र प्रदेश में हुआ था एसएसटी विचारक सम आलोचक एवं निबंधकार थे इनका व्यक्तित्व और कृतित्व अत्यंत प्रभावशाली था कई वर्ष तक आंध्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे वहां कृष्णा कोत्तर अध्ययन एवं अनुसंधान विभाग के अध्यक्ष एवं प्रोफेसर हैं इनका निधन सन 2005 ईस्वी में हो गया साहित्यिक परिचय-श्री रेड्डी की हिंदी साहित्य सेवा साधना एवं निष्ठा सराहनीय हिंदी तौर पर देश के निवासी होते हुए भी प्रोफेसर रेड्डी ने हिंदी भाषा और पर अच्छा अधिकार प्राप्त कर लिया है इनकी भाषा परिमार्जित बता सकते हैं इनके साहित्य में इनका मानवतावादी दृष्टिकोण स्पष्ट झलकता है इनके निबंध हिंदी तेलुगु और अंग्रेजी भाषा की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं भाषा की समस्याओं पर अनेक विद्वान ने बहुत कुछ लिखा है किंतु भाषा और आधुनिकता पर वैज्ञानिक दृष्टि से विचार करने वाले में प्रोफेसर रेडी प्रमुख हैं

डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी जीवन परिचय

 हिंदी के श्रेष्ठ निबंधकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन 1960 ईस्वी में बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था इनके पिता श्री अनमोल द्विवेदी ज्योतिषी और संस्कृत के प्रकांड पंडित थे इनकी माता का नाम ज्योतिषमति था काशी जाकर इन्होंने संस्कृत साहित्य और ज्योतिषी का उच्च स्तरीय ज्ञान प्राप्त किया उनकी प्रतिभा का विशेष विकास विश्वविख्यात संस्थान शांतिनिकेतन में हुआ वहां एक 11 वर्षों तक हिंदी भवन के निदेशक के रूप में कार्य करते रहे 1949 में लखनऊ विश्वविद्यालय ने इन्हें डिलीट के बाद से 1957 में भारत सरकार ने पद्म भूषण की उपाधि से विभूषित किया 19 मई 1979 ईस्वी को उनका स्वर्गवास हो गया साहित्यिक योगदान-हजारी प्रसाद द्विवेदी साहित्य के प्रख्यात निबंधकार इतिहास लेखक अन्वेषक आलोचक संपादक तथा उपन्यासकार के अतिरिक्त कुशल वक्ता और सफल अध्यापक भी थे वे मौलिक चिंतक भारतीय संस्कृति और इतिहास के मर्मज्ञ बंगला तथा संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे इनकी रचनाओं में नवीनता और प्राचीनता का अपूर्व समन्वय था इन्होंने विश्वभारती और अभिनव भारती ग्रंथ माला का संपादन किया यह ललित निबंध लेखकों में...

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर जीवन परिचय

 प्रभाकर जी का जन्म सनी सो 6 ईस्वी में सहारनपुर जिले के देव गोदन कस्बे में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था इनके पिता पंडित रामदरश मिश्र पुरोहित  करते थेइनकी माता जी का स्वभाव बड़ा उग्र था इनकी शिक्षा नगर नहीं हुई जब एक खुर्जा के एक संस्कृत विद्यालय में पढ़ते थे तो प्रसिद्ध राष्ट्रीय नेता अशरफ अली के ओजस्वी भाषण को सुनकर परीक्षा छोड़ दी और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लेने लगे 1930 ईस्वी से 1932 ईस्वी तक और 1942 में जेल में रहे 9 मई सन 1995 ईस्वी को इस महान साहित्यकार की मृत्यु हो साहित्यिक योगदान-प्रभाकर जी हिंदी के लघु कथा रेखाचित्र संस्मरण रिपोतार्ज एवं ललित निबंध लेखकों में अग्रगण्य हैं यह भारत की स्वतंत्रता की लालसा लेकर साहित्य क्षेत्र में "हुए उन्होंने अनेक नई विधाओं पर फुटकर रचनाएं की और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपूर्व सफलता प्राप्त की उन्होंने पत्रकारिता को स्वार्थ सिद्धि का साधन बना कर महान मानवीय मूल्यों की रचना की एक आदर्श पत्रकार के रूप में हिंदी जगत में प्रतिष्ठित हुए रचनाएं- रेखा चित्र-महक के आंगन चौकी द्वार, जिंदगी मुस्काई लघु कथा-आकाश के तारे, धरती क...

वासुदेव शरण अग्रवाल जीवन परिचय

 वासुदेव शरण अग्रवाल का जन्म सन 1950 ईस्वी में हुआ था उनके माता पिता लखनऊ में रहते थे और इनका बचपन लखनऊ में व्यतीत हुआ और यही इनकी प्रारंभिक शिक्षा भी हुई इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से m.a. तथा लखनऊ विश्वविद्यालय से डिलीट की उपाधि प्राप्त की डॉक्टर अग्रवाल नेपाली संस्कृत और अंग्रेजी भाषाओं भारतीय संस्कृति और पुरातत्व का गहन अध्ययन किया था इनका देहावसान 1967 ईस्वी में हो गया साहित्यिक परिचय-डॉ अग्रवाल भारतीय संस्कृति पुरातत्व और प्राचीन इतिहास के प्रकांड पंडित एवं अन्वेषक थे इनके मन में भारतीय संस्कृति को वैज्ञानिक अनुसंधान की दृष्टि से प्रकाश में लाने की उत्कट इच्छा थी और उन्होंने उत्कृष्ट कोटि के अनुसंधान के निबंधों की रचना की इनकी अधिकांश निबंध प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति से संबंध है जायसी की पद्मावत पर इनकी टीबा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है हिंदी साहित्य के इतिहास में अपनी मौलिकता विचारशील था और विद्वता के लिए एक कृतियां-कल्पवृक्ष, पृथ्वी पुत्र, भारत की एकता, माता भूमि भाषा शैली-