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प्रसाद जी का जन्म 30 जनवरी 1889 ईस्वी में काशी के सुगनी साहू नामक प्रसिद्ध वैसे परिवार में हुआ था छोटी अवस्था में ही पिता तथा बड़े भाई के देहांत हो जाने के कारण इनका शिक्षा क्रम शीघ्र टूट गया घर का भार वहनहन करते हुए भी इन्होंने स्वाध्याय से हिंदी अंग्रेजी संस्कृत उर्दू फारसी का गहन अध्ययन किया परिवार जनों की मृत्यु अर्थंसंकट पत्नी वियोग आदि संघर्षों को झेलते हुए 14 जनवरी 1937 ईस्वी में स्वर्ग को सीधा रखें -साहित्यिक परिचय-जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रवर्तक उन्नायक तथा प्रतिनिधि कवि के होने के साथ-साथ युग प्रवर्तक नाटककार कथाकार तथा उपन्यासकार बीसीए विशुद्ध मानवतावादी दृष्टिकोण वाले प्रसाद जी ने अपने काव्य में आध्यात्मिक आनंद बाद की प्रतिष्ठा की है प्रेम और सौंदर्य इनके काव्य के प्रमुख विषय रहे हैं किंतु मानवीय संवेदना उनकी कविता का प्राण है